Wednesday, 5 June 2019

बेटी



है वर्षो से लोगो का कहना
पड़ेगा आधी जिंदगी ढोना ,
क्यों चाहे हम बेटी को
बेटी तो एक बोझ है ना।

बेटी को बस जल्द से जल्द
विवाह कर के विदा है करना ,
बेटा हैं जीवन का सहारा
बेटी को बस बोझ समझना।

क्यों पाले एक बेटी को
जो पूजे हमे ईश्वर समान ,
कर बेटे पर इतना भरोसा
गलती करता हर इनसान ।

बेटा है तो खुशिया है
बेटी है तो बस है रोना ,
क्यों चाहे हम बेटी को
बेटी तो एक बोझ है ना ।

बेटी है तो है गरीबी
पर बेटा तो कमाएगा ,
करेगा सेवा खूब हमारी
खुशिया घर में लाएगा ।

दहेज देंगे कहा से  जब
हम होंगे इतने गरीब ,
जब बेटी होगी घर में तब
दुख मुश्किलें होंगी करीब ।

जब घर में होगी बेटी तो
पड़ेगा सुख के साधन खोना ,
क्यों चाहे हम बेटी को
बेटी तो एक बोझ है ना ।

दहेज कहा से देंगे हम
जब होगा बेटी का विवाह ,
कौन चुनेगा आखिर
काटों से भरा हुआ राह ।

बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ
बस नाम का है यह अभियान ,
लड़ना होगा खुद हमें
बचाने को बेटियों का सममान ।

क्या बेटी है सिर्फ पत्थर
और बेटा है महँगा सोना ,
क्यों चाहे हम बेटी को
बेटी तो एक बोझ है ना ।

कर नही रहा मैं बेटों का अपमान
क्योंकि मैं भी तो एक बेटा हूँ ,
पर बचाना है बेटियों का जीवन
बस इसीलिए शब्दो को ऐसे समेटा हूँ ।

मैं बेटो को बुरा नही कहता
पर होते है बहुत से बेटे ऐसे ,
जिसने पाला-पोसा उसी को
काट लेते है आस्तीन के साँप के जैसे ।

पहलो अपने दिल में तुम भी
बेटी के प्यार का गहना ,
क्यों चाहे हम बेटी को
बेटी तो एक बोझ है ना ।

                        - यश कुमार


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